राम अवतार बैरवा की गज़ल- “महज इतनी सी दूरी हो चांद-छत की, मैं गर ज़ीना रखूं तो नीचे उतर आए”
शीत राग की मधु बेला में जब सब पत्ते झड़ जाएंगे, तलहट से कुछ नन्हें पौधे नम घूप पकड़ने आएंगे। बीच सड़क पे बे-बस अम्मा तारों से लिपटके रोयेगी, आधी रात जब भूखे बच्चे चांद को खाने जाएंगे । सावन को कसम दिला देना, इस बार न बरसे सूरत पे,Continue Reading










