13 अक्तूबर 1992 को परवाणू में ऐसी घटना हुई थी जिसे आज भी जब याद करते ही रूह कांप जाती है। 10 यात्रियों को लेकर जा रही केवल कार अचानक टूट गई और सभी लोग 1300 फीट की ऊंचाई पर हवा में लटक गए।

हिमाचल के प्रवेशद्वार परवाणू के टीटीआर होटल में रोपवे में तकनीकी खराबी आने के कारण 11 लोग फंस गए हैं। महिला सहित चार लोगों को अब तक रेस्कयू किया जा चुका है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हालात का जायजा लेने के लिए खुद घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। फंसे लोगों को निकालने के लिए कसौली से एयरफोर्स की मदद भी ली जा रही है। वहीं इस घटना ने 1992 के उस हादसे की यादें ताजा कर दी हैं जब 10 लोगों की हवा में सांसें अटक गईं थीं।
ये हुआ था तब
1300 फीट की ऊंचाई पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे दस लोगों की जान बचाने वाले सेना के जाबांज अफसर की बहादुरी को आज भी हर कोई सलाम करता है। 1980 का दौर शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में परवाणू स्थित शिवालिक पहाड़ियों में केवल कार टिंबर ट्रेल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई। समंदर तल से करीब 5000 फीट की ऊंचाई पर केवल कार से वादियों को निहारते हुए 1.8 किमी सफर मन को रोमांचित कर देता है। 13 अक्तूबर 1992 को परवाणू में ऐसी घटना हुई जिसे आज भी जब याद करते ही रूह कांप जाती है।
10 यात्रियों को लेकर जा रही केवल कार अचानक टूट गई और सभी लोग 1300 फीट की ऊंचाई पर हवा में लटक गए। यह देख केवल कार का संचालन करने वाली कंपनी के कर्मचारियों के भी हाथ-पांव फूल गए। सेना को बुलाया गया। कर्नल इवान जोसफ क्रेस्टो (रिटायर्ड) को इस बचाव अभियान की कमान सौंपी गई। उस दौरान इवान जोसफ सेना में मेजर के पद पर तैनात थे। इवान जोसफ ने वायु सेना के टॉप हेलिकॉप्टर पायलट और अपने साथियों के साथ 10 जिंदगियों को बचाने के लिए संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। रस्सी के सहारे इवान जोसफ एमआई-17 हेलीकॉप्टर से हवा में लटक रही केवल कार के भीतर पहुंचे।

