
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रजनन विकारों और लोगों में बढ़ी रही नपुंसकता की समस्या को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना बहुत आवश्यक है। इसके लिए दिनचर्या में योगासनों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
योगासन न सिर्फ आपको शारीरिक-मानसिक तौर पर फिट रखने में सहायक होते हैं साथ ही इससे प्रजनन समस्याओं और उसके कारकों को भी कम किया जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों ने नियमित रूप से योगासनों का अभ्यास किया उनमें अन्य लोगों का तुलना में गर्भधारण से संबंधित विकारों का जोखिम कम देखा गया। आइए जानते हैं कि किन योगासनों के अभ्यास की आदत इसमें आपके लिए लाभकारी हो सकती है?

योगासन समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने के अलावा प्रभावी तरीके से प्रजनन विकारों को दूर करने का बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
- योग अंडाशय और गर्भाशय को उत्तेजित करता है।
- ऊर्जा चैनलों को शुद्ध करके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
- कमर और कूल्हों को लचीला बनाता है।
- प्रजनन अंगों में रक्त प्रवाह और आपूर्ति में सुधार करता है।
- तनाव और चिंता को दूर करता है।

पश्चिमोत्तानासन योग को शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है। आगे की ओर झुकने का यह अभ्यास पीठ के निचले हिस्से, हैमस्ट्रिंग और कूल्हों को स्ट्रेच करता है। इस योग के अभ्यास के माध्यम से गर्भाशय और अंडाशय को उत्तेजित करने में मदद मिलती है। इस योग को तनाव दूर करने वाला भी माना जाता है।
शारीरिक-मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक करके प्रजनन विकारों को दूर करने के लिए पश्चिमोत्तानासन योग का नियमित अभ्यास करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

बद्धकोणासन (तितली पोज)
बद्धकोणासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाने से भी प्रजनन समस्याओं को दूर करने में सहायता मिल सकती है। इस योग के अभ्यास को जांघों के भीतरी हिस्से, कमर और घुटनों की स्ट्रेचिंग के लिए फायदेमंद माना जाता है। प्रजनन अंगों में रक्त के संचार को बढ़ाने और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में इस आसन से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। बद्धकोणासन का अभ्यास बहुत आसान है और इसे हर उम्र के लोग करके आसानी से लाभ पा सकते हैं।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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