चीतों के करण-अर्जुन हैं ये दोनों, जंगल की आग में मां को खोया, मुसीबतें सहीं मगर साथ नहीं छोड़ा

भारत के जंगलों में एक बार फिर से धरती के सबसे तेज जानवर चीता के पैरों की धमक सुनाई पड़ेगी. भारत की धरती से विलुप्त हो चुके चीते को एक बार फिर से वापस लाया जा रहा है. ये संभव हो पाया है नामीबिया की मदद से. यहां से 8 चीतों के परिवार को भारत लाया जा रहा है. ये सभी चीते 17 सितंबर को ग्वालियर पहुंच रहे हैं.

दो चीते हैं भाई-बहन

Cheetah

बता दें कि इनमें से 5 मादा और 3 नर चीते हैं. इन 8 चीतों में से दो ऐसे चीते हैं जिनकी कहानी किसी इंसान की कहानी जैसी लगती है. ये दोनों चीते भाई-बहन हैं. चीता कंजर्वेशन फंड (CCF) के अनुसार, दो से पांच साल की उम्र के पांच मादा चीता और 4.5 से 5.5 साल उम्र के 3 नर चीते भारत आएंगे. इन्हीं चीतों में दो में भाई-बहन हैं.

जीवनभर साथ रहती है ये प्रजाति

asiatic cheetah

ये  नामीबिया में ओत्जीवारोंगो के पास सीसीएफ के 58000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले निजी अभयारण्य में जुलाई 2021 से रह रहे हैं. ये दोनों चीते उस प्रजाति से हैं जो जीवनभर साथ रहने के लिए जाने जाते हैं इसके साथ ही एक साथ शिकार करना इनकी खासियत है. इन्हीं में से एक नर चीता ऐसा है जो नामीबिया के संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में मार्च 2018 में जन्मा था. खास बात ये है कि इसकी मां भी वहीं जन्मी थी.

जंगल की आग में झुलस गई थी इनकी मां

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दो भाई-बहन चीतों में से एक 2 साल की मादा है. ये दोनों  दक्षिण पूर्व नामीबिया में गोबाबिस के पास मिले थे. जब इन दोनों को खोजा गया उस समय ये बहुत कुपोषित थे. सीसीएफ का कहना है कि इनके मिलने से कुछ सप्ताह पहले ही जंगल में लगी आग में इनकी मां झुलस कर मर गई थी. इसके बाद ये दोनों सितंबर 2020 से सीसीएफ के केंद्र में रह रहे हैं. बता दें कि सीसीएफ एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय नामीबिया में है.

इन्हीं में से एक 2.5 साल की मादा चीता एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में अप्रैल 2020 में जन्मी थी. चौथी मादा चीता 2017 के अंत में गोबाबिस के पास एक खेत में मिली थी. जिस समय ये खेत में काम करने वाले श्रमिकों को मिली वह बहुत कुपोषित थी. बाद में उसका इलाज कर स्वस्थ किया गया. सीसीएफ के कर्मियों ने एक अन्य मादा चीता को फरवरी 2019 में नामीबिया के उत्तर पश्चिम हिस्से में कमनजाब गांव के पास से पकड़ा था.