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“राहों में मुसीबत आई, पर मैंने हार नहीं मानी, मंजिल पर पहुंच कर लिखूंगी, अपनी सफलता की कहानी”.
ये पक्तियां राजस्थान की रहने वाली IAS ऑफिसर उम्मुल खेर (IAS officer Ummul Kher) पर बिलकुल फिट बैठती है. वो झुग्गी में रहीं, गरीबी देखी, 16 फ्रैक्चर और 8 सर्जरी के बाद भी हिम्मत नहीं हारी. उनकी राह में कई मुसीबतें आईं, लेकिन आज उम्मुल अपनी मेहनत के दम पर IAS बन देश की सेवा कर रही हैं.
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झुग्गी में रहीं, गरीबी में बीता बचपन
उम्मुल खेर का राजस्थान के पाली मारवाड़ में एक गरीब परिवार में जन्म हुआ. जब उम्मुल बहुत ही छोटी थीं तो उनके पिता परिवार के साथ दिल्ली आ गए. यहां भी उनकी मुसीबतें कम नहीं हुईं. उनका परिवार दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में एक झुग्गी झोपड़ी में रहने लगा. पिता फेरी लगाकर कपड़े बेचते थे. बड़ी मुश्किल से परिवार का पेट भरता.
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फिर एक दिन परिवार पर बड़ी मुसीबत आई, जब सरकारी आदेश के तहत निजामुद्दीन इलाके की झुग्गियों को उजाड़ दिया गया. साल 2001 में वहां से उनका परिवार त्रिलोकपुरी की झुग्गियों में आकर एक किराए के मकान में रहने लगा.
IAS Ummul Kher
बचपन से इस गंभीर बिमारी से ग्रसित थीं उम्मुल
उम्मुल खेर को बचपन से बोन फ्रेजाइल डिसऑर्डर से पीड़ित थीं. जिसकी वजह से उनकी हड्डियां कमजोर होने से कई बार टूट जाती थीं. इस बिमारी के चलते उनको कुल 16 फ्रैक्चर हुए. 8 बार सर्जरी हुई. इतना सब कुछ झेलने के बाद भी उम्मुल ने अपना हौंसला बरकरार रखा.
ट्यूशन पढ़ाकर पढ़ाई पूरी कीं
उम्मुल एक होनहार छात्रा थीं. वो पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती थीं. मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. जिसकी वजह से उम्मुल अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ट्यूशन पढ़ाने लगीं. उससे मिलने वाली फीस को वो अपनी पढ़ाई में खर्च करती थीं.
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उम्मुल मेहनत के साथ पढ़ाई करती रहीं. हाईस्कूल में 91 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 89 प्रतिशत के साथ पास हुईं. डीयू से स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने JNU के इंटरनेशनल स्कूल से परास्नातक की डिग्री ली. इसके बाद पीएचडी में एडमिशन ले लिया. इसके साथ ही UPSC की कठिन परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दिया.
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फिर पहले ही प्रयास में UPSC क्लियर कर IAS बनीं
उम्मुल ने तमाम मुसीबतों को पार करते हुए UPSC की तैयारी करती रहीं. उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर साल 2017 में ही अपने पहले प्रयास में UPSC की परीक्षा पास किया. उम्मुल ने 420वीं रैंक हासिल की थी. जिसके बाद उन्हें IAS का पद मिला. आज उम्मुल के संघर्ष की कहानी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणादायक है.